← Bhakti Songs

एरी मैं तो प्रेम दिवाणी

Eri Main to Prem Diwani

Meera Bai (16th c.) · pad no. 2 as quoted by Hariaudh

Original (Rajasthani/Braj)

एरी मैं तो प्रेम दिवाणी मेरा दरद न जाणे कोय। सूली ऊपर सेज हमारी किस विध सोणा होय। गगन मंडल पै सेज पिया की किस विध मिलना होय। घायल की गति घायल जानै की जिन लाई होय। जौहरी की गति जौहरी जाने की जिन जौहर होय। दरद को मारी बन बन डोलू वैद मिला नहि कोय। मीरा की प्रभु पीर मिटैगी (जब) बैद सँवलिया होय।

सरल हिंदी भावार्थ

ड्राफ़्ट · समीक्षा बाकी (draft, under review)

अरी सखी, मैं तो प्रेम में दीवानी हूँ, मेरा दर्द कोई नहीं जानता। मेरी सेज (बिस्तर) तो सूली पर है, मैं कैसे सोऊँ? प्रियतम की सेज आकाश-मंडल में है, उनसे कैसे मिलूँ? घायल का हाल घायल ही जानता है, या वह जिसने घाव दिया हो। हीरे-मोती का मोल जौहरी ही जानता है। दर्द की मारी मैं वन-वन भटकती हूँ, पर कोई वैद्य नहीं मिला। मीरा का दर्द तभी मिटेगा जब साँवरिया (श्रीकृष्ण) ही वैद्य बनकर आएँ।

🔊 हिंदी अर्थ / Hindi meaning

AI voice (Indic Parler-TTS, Apache-2.0) reading the Hindi meaning.

English meaning

No public-domain English translation added yet.

AI-assisted simple meaning (सरल भावार्थ) based only on the public-domain sources listed; under review.