जसुदा हरि पालने झुलावै
Jasoda Hari Palne Jhulave
Surdas (16th c.) · pad no. ६ as quoted by Hariaudh
Original (Braj Bhasha)
जसुदा हरि पालने झुलावै। हलरावै दुलराइ मल्हावै जोई सोई कछु गावै। मेरे लाल को आउ निंदरिया काहें न आनि सुआवै। तू काहें न बेगही आवै तोको कान्ह बुलावै। कबहुं पलक हरि मूंदि लेत हैं कबहुँ अधर फरकावै। सोवत जानि मौन ह्वै ह्वै रहि करि करि सैन बतावै। येहि अंतर अकुलाइ उठे हरि जसुमति मधुरे गावै। जो सुख सूर अमर मुनिदुरलभ सो नँदभामिनिपावै।
सरल हिंदी भावार्थ
ड्राफ़्ट · समीक्षा बाकी (draft, under review)यशोदा जी बाल कृष्ण को पालने में झुला रही हैं। वे उन्हें हिलाती हैं, दुलारती हैं, पुचकारती हैं और जो मन में आए गाती हैं — ‘अरी निंदिया, मेरे लाल के पास आ, आकर उसे सुला क्यों नहीं देती? तू जल्दी क्यों नहीं आती, तुझे कान्हा बुला रहा है।’ कृष्ण कभी पलकें मूँद लेते हैं, कभी होंठ फड़काते हैं। उन्हें सोया जानकर यशोदा चुप हो जाती हैं और इशारों से (दूसरों को चुप रहने को) कहती हैं। इतने में कृष्ण अकुलाकर जाग उठते हैं और यशोदा फिर मीठे स्वर में गाने लगती हैं। सूरदास कहते हैं — जो सुख देवताओं और मुनियों को भी दुर्लभ है, वह नंद की पत्नी यशोदा को मिल रहा है।
🔊 हिंदी अर्थ / Hindi meaning
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English meaning
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