← Puja Vidhi

अहोई अष्टमी व्रत

Ahoi Ashtami Vrat

🙏 Please follow your family/local tradition. Verified by a priest: pending.

Partial: only the parts we could source are shown. See “Not yet included” below.

Overview · परिचय

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण अष्टमी को माताएँ संतान की लंबी आयु और सुख के लिए रखती हैं: दिन भर उपवास, दीवार पर अहोई माता (और स्याहू/सेह व उसके बच्चों) का चित्र बनाकर पूजा, कथा सुनना, और शाम को तारे देखकर अर्घ्य देकर व्रत खोलना।

Folk vrata kathā (लोक कथा): it has no known Sanskrit original, so none is shown. The story below is our own simple-Hindi retelling of the traditional tale (not copied from any printed edition). Draft, under review.

अहोई माता की कथा (लोक कथा)

लोक कथा · folk kathā (no Sanskrit original)हमारे शब्दों में · draft, under review

यह लोक कथा है — इसका कोई संस्कृत मूल ज्ञात नहीं है, इसलिए संस्कृत नहीं दिखाई गई। कथा अलग-अलग क्षेत्रों में थोड़े अंतर से कही जाती है; यहाँ पारंपरिक कथा हमारे अपने सरल शब्दों में है (किसी छपी पुस्तक से नकल नहीं)। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार पढ़ें। draft, समीक्षा बाकी।

कथा (7 अंश)
  1. [1] एक गाँव में एक साहूकारनी रहती थी, जिसके सात बेटे थे। दिवाली से कुछ दिन पहले वह घर लीपने के लिए मिट्टी लाने जंगल गई।

  2. [2] मिट्टी खोदते समय उसकी कुदाल अनजाने में एक स्याहू (सेह/साही) की माँद में लगी और उसका एक बच्चा मर गया। साहूकारनी को बहुत दुख हुआ, पर वह चुपचाप घर लौट आई।

  3. [3] कुछ ही समय में, एक-एक करके उसके सातों बेटे चल बसे। दुख से टूटी साहूकारनी ने गाँव की बुज़ुर्ग स्त्रियों को रोते-रोते अपनी भूल बताई।

  4. [4] स्त्रियों ने कहा, "तुमने सच मन से अपनी गलती मान ली, यह अच्छा किया। कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई माता का व्रत करो, स्याहू और उसके बच्चों का चित्र बनाकर उनकी पूजा करो और क्षमा माँगो।"

  5. [5] साहूकारनी ने पूरे विधान से व्रत किया, अहोई माता और स्याहू का चित्र बनाकर पूजा की, और हर वर्ष सच्चे पश्चाताप के साथ यह व्रत करती रही।

  6. [6] उसकी भक्ति और सच्चे मन से प्रसन्न होकर अहोई माता ने उस पर कृपा की, और (कथा के अनुसार) उसे फिर से सात पुत्रों का सुख मिला।

  7. [7] तभी से माताएँ यह व्रत संतान की रक्षा और सुख के लिए करती हैं। कथा यह भी सिखाती है कि किसी भी जीव को अनजाने में भी दुख पहुँचे, तो अपनी भूल मानकर क्षमा माँगनी चाहिए। हे अहोई माता, जैसे साहूकारनी पर कृपा की, वैसे सब पर करना।

Not yet included (TODO)

  • Step-by-step puja vidhi: no public-domain source verified yet
  • Āratī text
  • Audio (Hindi/Sanskrit): coming soon
  • Priest / family-tradition review